Know who is Labh Singh Ugoke who

जानिए कौन है लाभ सिंह उगोके जिन्होंने चन्नी के सपने पर फेर दिया झाड़ू

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पंजाब ( पंजाब 365 न्यूज़ ) : पब्लिक है ये सब जानती है। ये पूरी तरह से जानती है की किसे फर्श पर पहुँचाना है और किसे अर्श पर। चुनाव के पहले किसी ने सोचा भी नहीं होगा को cm,चन्नी को एक साधारण सा लड़का जो की छोटी सी मोबाइल रिपेयर की दूकान चलाता है वही चन्नी को चुनाव में कड़ी मात देगा। और चन्नी की ऐसी हार हुई जिसने इतिहास रच दिया। आपको बता दे कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपनी दोनों सीट श्री चमकौर साहिब और भदौड़ से चुनाव हार चुके हैं। भदौड़ में सीएम चन्नी को बेहद आम शख्स ने सियासी शिकस्त दी है। आम आदमी पार्टी ने लाभ सिंह उगोके को अपना प्रत्याशी बनाया था। लाभ सिंह ने प्लंबर का कोर्स किया है और वह मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं। गरीब घर से ताल्लुक रखने वाले नौजवान लाभ सिंह उगोके ने सीएम चन्नी को 37500 मतों से हराकर इतिहास रचा। आपको बता दे की लाभ सिंह बहुत ही साधारण से परिवार से है। दो कमरों के घर में रहने वाले लाभ सिंह की मां एक सरकारी स्कूल में साफ़ सफाई का काम करती है । उनके पिता ने मजदूरी कर अपने परिवार को आगे बढ़ाया। उनकी पत्नी घरेलू महिला हैं और लाभ के दो बच्चे हैं। लाभ सिंह पिछले लगभग 10 साल से आप से जुड़े हैं। वह भगवंत मान के करीबी हैं। उन्होंने बताया की वह हलका भदौड़ का दिल्ली मॉडल की तरह विकास करेंगे।

चन्नी इतनी सम्पति के है मालिक :
सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के पास 07 करोड़ 97 लाख रुपये की चल और अचल संपति है। सीएम चन्नी की पत्नी कमलजीत कौर भी 04 करोड़ 18 लाख और 45 हजार रुपये की चल-अचल संपत्ति की मालकिन हैं। चन्नी व उनकी पत्नी कमलजीत कौर के पास फॉर्य्चूनर गाडियां हैं। चन्नी के पास चार करोड़ रुपये से ज्यादा की आवासीय जगह है। जबकि पत्नी के पास भी दो करोड़ 27 लाख और 85 हजार रुपये की आवासीय जगह है। वहीं सीएम चन्नी को हराने वाले आप के उम्मीदवार लाभ सिंह उगोके के पास सिर्फ 75 हजार रुपये की नकदी है और 2014 मॉडल की पुरानी बाइक व दो कमरों का मकान है।


मुझे चुनाव से पीछे हटने के लिए 5 करोड़ की ऑफर हुई थी :
लाभ सिंह उगोके ने कहा कि मुझे पीछे हटने के लिए पांच करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था, जिसका ऑडियो मेरे पास मौजूद है। लाभ सिंह उगोके ने कहा कि वह सिस्टम बदलने की लड़ाई लड़ रहे हैं, किसी भी कीमत में अपना जमीर नहीं बदल सकते हैं, क्योंकि कुल्लियों वालों की लड़ाई महलों वालों से थी लेकिन भदौड़ के जुझारू लोग पूंजीपति चन्नी को भारी बहुमत से मात देकर 1952 वाला इतिहास दोहराया है।

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