Is not being able to become CM

क्या CM नहीं बन पाना सिद्धू के इस्तीफे की वजह है ?

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पंजाब (पंजाब 365 न्यूज़ ) : पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद सिद्धू की नज़रे क्या सच में CM- पद पर थी। क्या सच में सिद्धू के एक दलित SM- बनाने पर खफा है जिसकी वजह से उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया है। आइये जाने कुछ ऐसी ही अनसुनी बाते जो शायद किसी ने अनदेखा कर दी हो।
सिद्धू एक ऐसा इंसान जो पहले प्रधान पद की कुर्सी पाने के लिए कांग्रेस पर इतने इलज़ाम लगाए। इसी कुर्सी के खतिर ही इसने अपनी ही सरकार की ईंट से ईंट बजा दी थी। उसी सिद्धू ने अचानक से उसी पद से इस्तीफा दे दिया आखिर क्यों। पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस के प्रधान पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। कल तक सिद्धू 2022 में पंजाब में कांग्रेस को सत्ता दिलाने का दम भर रहे थे। आज अचानक कुर्सी छोड़ दी।

असल में सिद्धू का इस्तीफा अचानक नहीं है। इसकी पटकथा कैप्टन के कुर्सी से हटते ही तैयारी होनी शुरू हो गई थी। सिद्धू असल में कांग्रेस को कैप्टन की तरह चलाना चाहते थे। वह संगठन से लेकर सरकार तक सब कुछ अपने कंट्रोल में चाहते थे। ऐसा हुआ नहीं और सिद्धू को स्थानीय नेताओं से लेकर हाईकमान तक की चुनौती से गुजरना पड़ा। इस वजह से सिद्धू करीब सवा 2 महीने में ही कुर्सी छोड़कर चले गए।
कैप्टन अमरिंदर के हटने के बाद सिद्धू खुद CM बनना चाहते थे। हाईकमान ने सुनील जाखड़ को आगे कर दिया। सिद्धू मन मसोस कर रह गए। वो राजी हुए तो पंजाब में सिख CM ही होने का मुद्दा उठा। सिद्धू ने फिर दावा ठोका, लेकिन हाईकमान ने उन्हें नकार सुखजिंदर रंधावा को आगे कर दिया। इसके बाद सिद्धू नाराज हो गए। अंत में चरणजीत चन्नी CM बन गए।


सिद्धू ने मंगलवार दोपहर पंजाब कांग्रेस प्रधान पद से इस्तीफा दिया था। इसके कुछ देर बाद कोषाध्यक्ष गुलजार इंदर चहल ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सिद्धू के रणनीतिक सलाहकार पूर्व DGP मुहम्मद मुस्तफा की पत्नी और कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना ने भी मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। थोड़ी देर बाद महासचिव योगेंद्र ढींगरा ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद परगट सिंह के इस्तीफे की अफवाह उड़ी, लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया।
इससे पहले पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच कांग्रेस हाईकमान ने नवजोत सिद्धू का इस्तीफा फिलहाल नामंजूर कर दिया है और उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच सिद्धू के पटियाला स्थित घर में हलचल बढ़ गई है। सिद्धू यहां से चंडीगढ़ जा सकते हैं। वहां वह किन नेताओं से मिलेंगे, इसके बारे में स्थिति साफ नहीं है। कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी को सिद्धू को मनाने का जिम्मा सौंपा है। चन्नी ने आज सुबह भी मंत्री परगट सिंह और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पटियाला भेजा था। वहां दोनों मंत्रियों की सिद्धू के साथ बैठक हुई। इसके बाद दोनों मंत्री चंडीगढ़ आ गए।

वहीं, CM चन्नी की अगुवाई में कैबिनेट की मीटिंग शुरू हो गई है। इस कैबिनेट बैठक में हाईकमान के दिए 18 सूत्रीय फॉर्मूले से जुड़े बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। जिससे सीधे तौर पर सिद्धू को जवाब दिया जाएगा। सिद्धू ने इस्तीफे की वजह नहीं बताई है। हालांकि उनके सलाहकार इसे हाईकमान के फॉर्मूले पर काम न करने से जोड़ रहे हैं। कैबिनेट की मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री चन्नी मीडिया से भी बातचीत कर सकते हैं।

कैसे टुटा सिद्धू के सब्र का बांध :
कांग्रेस में यह परम्परा रही है कि जब भी कांग्रेस की सरकार बनती है तो कैबिनेट बैठक से पहले प्रधान को भी वहां बुलाया जाता है। रविवार को 15 मंत्रियों ने शपथ ली। इसके बाद सोमवार को CM चरणजीत चन्नी ने पूरी कैबिनेट की बैठक बुलाई। इसके बावजूद सिद्धू वहां नहीं पहुंचे। इस वजह से उनकी नाराजगी सामने आ गई।
चन्नी के CM बनने के बाद सिद्धू उनके ऊपर हावी होना चाहते थे। सिद्धू लगातार उनके साथ घूमते रहे। कभी हाथ पकड़ते ताे कभी कंधे पर हाथ रखते। इसको लेकर सवाल होने लगे कि सिद्धू सुपर CM की तरह काम कर रहे हैं। आलोचना होने लगी तो सिद्धू को पीछे हटना पड़ा।
चन्नी के CM बनते ही सिद्धू चाहते थे कि एडवोकेट डीएस पटवालिया पंजाब के नए एडवोकेट जनरल हों। उनकी फाइल भी भेज दी गई थी। इसके बाद दूसरे नेताओं ने अड़ंगा लगा दिया। पहले अनमोल रतन सिद्धू और फिर एपीएस देयोल को एडवोकेट जनरल बना दिया गया।
चन्नी सरकार में सिद्धू अपने करीबियों को मंत्री बनवाना चाहते थे। इसमें सिद्धू की मनमानी नहीं चली। कैप्टन के करीबी रहे ब्रह्म मोहिंदरा, विजय इंद्र सिंगला से लेकर कई पुराने मंत्री वापस शामिल हुए। इसके अलावा राणा गुरजीत पर रेत खनन में भूमिका के बावजूद उन्हें मंत्री पद दिया गया। ऐसे ही 4 नामों को लेकर सिद्धू नाराज थे। इन्हें रोकने में उनकी नहीं चली।
कांग्रेस हाईकमान ने मंत्रियों के नाम पर अंतिम मुहर लगाने के लिए बुलाई बैठक में सिर्फ चरणजीत चन्नी को बुलाया। सिद्धू को इसमें शामिल नहीं किया गया। सिद्धू की बताई लिस्ट को हाईकमान ने फाइनल नहीं किया। इसकी वजह से वो नाराज हो गए।
सिद्धू चाहते थे कि सिद्धार्थ चट्‌टोपाध्याय को पंजाब का नया DGP बनाया जाए। इसके लिए पूरी खेमेबंदी भी शुरू हो गई थी। इसके बावजूद दिनकर गुप्ता छुट्‌टी पर गए तो चन्नी ने इकबालप्रीत सिंह सहोता को डीजीपी का चार्ज दे दिया।
सिद्धू चाहते थे कि राज्य का गृह विभाग CM चरणजीत चन्नी के ही पास रहे। इसके बावजूद मंत्रालय बंटवारे में होम मिनिस्ट्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को दे दी गई। इसके बाद सिद्धू का सब्र टूट गया। उन्होंने दोपहर होते-होते इस्तीफा दे दिया।

सिद्धू ने कांग्रेस हाईकमान पर दबाव डालकर सुखजिंदर रंधावा को मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया। सिद्धू जानते थे कि अगर रंधावा CM बने तो वो अगले साल कांग्रेस का चेहरा नहीं होंगे। चरणजीत चन्नी के सहारे वो अगली बार कुर्सी पाने में कामयाब होने की उम्मीद में थे।

हरीश रावत के जरिए उन्होंने यह बात भी कही कि अगला चुनाव सिद्धू की अगुआई में लड़ा जाएगा, तब विवाद शुरू हो गया कि यह तो पंजाब के CM चरणजीत चन्नी की भूमिका पर सवाल खड़े करने जैसा है। इसके बाद हाईकमान को सफाई देनी पड़ी कि अगले चुनाव में सिद्धू के साथ चन्नी भी चेहरा होंगे। सिद्धू समझ गए कि अगली बार कांग्रेस सत्ता में आ भी गई तो उनके लिए CM की कुर्सी पाना इतना आसान नहीं है।

पंजाब कांग्रेस पद से इस्तीफे के बाद नवजोत सिद्धू ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। सिद्धू ने कहा कि 6 साल पहले जिन्होंने बादलों को क्लीन चिट दी। उन्हें इंसाफ का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें सीधे तौर पर नए कार्यकारी डीजीपी इकबाल प्रीत सहोता को निशाना बनाया गया है। जिन्होंने ब्लैंकेट बेल दी, वह एडवोकेट जनरल हैं। इसमें पूर्व DGP सुमेध सिंह सैनी के वकील रह चुके एडवोकेट एपीएस देयोल को टारगेट किया है। सिद्धू ने कहा कि मैंने हाईकमान को न गुमराह किया और न होने दूंगा। इन लोगों को लाकर सिस्टम नहीं बदला जा सकता। जिन लोगों ने ड्रग तस्करों को सुरक्षा कवच दिया। उन्हें पहरेदार नहीं बनाया जा सकता। सीधे तौर पर नए मंत्रियों को लेकर यह बात कही गई। सिद्धू ने कहा कि मैं अडूंगा और लडूंगा। कोई पद जाता है तो जाए।

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