Delta Plus

क्या है डेल्टा प्लस वेरिएंट ?

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डेल्टा वेरिएंट (अर्पित सिंह ) : घातक कोरोना वायरस अब नए अति संक्रामक वैरिएंट्स में विकसिक हो रहा है उपभेदों और म्यूटेशन के लिए बढ़ती चिंताओं के बीच, कोरोना वायरस के ही डेल्टा वेरिएंट के विकसित प्रकार को डेल्टा प्लस नाम के COVID-19- सार्स-CoV-२ या AY -1 के संस्करण ने भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में डर हलचल मचाना शुरू कर दिया है, कोरोना वायरस की दूसरी लहर की महामारी में कोरोना वायरस का बी1.617.2’ वेरिएंट ही ज़िम्मेदार था अतः अब इसकी एक और विकसित प्रकार जिसे डेल्टा प्लस नाम दिया गया है अत्यंत घातक है, महज़ चद दिनों में ही लगभग ४० लोगो की मृत्यु हुई है.

डेल्टा प्लस शरीर के मोनोक्लोनल एंटीबाडीज को काम करता है जिससे संक्रमण की सम्भावना बढ़ जाती है. यह वेरिएंट भी उसी प्रकार फेफड़ो के रिसेप्टर्स पर चिपक जाता है और बर्बाद करने लगता है जिससे व्यक्ति को साँस लेने में समस्या होती है श्वसन प्रणाली पर घातक असर देखने को मिल रही है . अभी इसके बारे में अध्ययन और जांच की जा रही है.


दिल्लीAIIMS के डॉक्टरों का कहना है की यह वायरस पहले से अधिक खतरनाक है इसलिए पहले से ज्यादा सतर्क रहना ज़रूरी है क्यूंकि अभी केसेस कम हैं मगर कितनी तेज़ी से फैलेगा और स्तिथि बाद से बदतर हो सकती है, पूर्व टेस्टिंग प्रणाली में RTPCR में भी यह पता नहीं लग सकता की कोरोना वायरस का अल्फा वेरिएंट है या डेल्टा वेरिएंट है, मौजूदा लोग जिन्होंने वैक्सीन ली है उनको भी सतर्क रहना ज़रूरी है क्यूंकि इस वेरिएंट से वैक्सीन की क्षमता पर भी असर पड़ता है .

लेकिन अभी इसमें अध्ययन की आवश्यकता है अगर नए नए वैरिएंट्स से वैक्सीन की क्षमता कम होगी तो हमें अपने वैक्सीन को उच्चक्षमता में विकसिक करना पड़ेगा. अभी ४० केसेस में कहना मुश्किल है की डेल्टा प्लस वेरिएंट से लड़ने में वैक्सीन कामयाब है या नहीं. मगर तीसरी लहर से बचने के लिए कोरोना के नियमो का पालन और भी सख्ती से करना होगा. मास्क लगाना और २ गज़ की सामाजिक दूरी को निजी स्तर पर भी जिम्मेदारी के साथ पालन करना होगा.

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