tractor march

ट्रैक्टर परेड : आज दिल्ली कूच करेंगे पंजाब व् हरयाणा के इतने ट्रैक्टर

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नई दिल्ली (पंजाब 365 न्यूज़) : कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानो को 2 महीने हो चले है लेकिन सरकार और किसानों के बीच बात बनते नज़र नहीं आ रही।  किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए है।  सरकार ने उनको दो दिन पहले प्रस्ताब दिया था की कृषि कानूनों को एक से डेड साल तक सरकार स्थगित कर देती है लेकिन किसान संगठनों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकरा दिया और अब किसान ट्रेक्टर मार्च पर अड़े हुए है।  किसानों ने पहले ही बोल दिया था की 26- जनवरी की परेड में वो ट्रेक्टर मार्च  निकालेंगे।  सरकार के समझने पर ही किसान संगठन गणतंत्र दिवस पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।

और अब किसान संगठनों के कई जत्थे कुछ दिनों के पूर्वाभ्यास और तैयारिओं के के बाद 26- जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड में हिस्सा लेने के लिए आज निकल पड़े हैं।  केंद्र के ठीक कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों ने कहा है की , वे गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर जलूस निकालेंगे।  संगठनों ने दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकलने की घोषणा की है।

भारती  किसान यूनियन , एकता उग्राहां के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा की हम सभी ट्रैक्टर परेड में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं  हमारा पहला जत्था खनौरी से और दूसरा जत्था डवबाली से रवाना होगा।  उन्होंने कहा की लोगो के उत्साह को देखते हुए हमारी  यूनियन से जुड़े हुए 30000-से अधिक ट्रेक्टर परेड का हिस्सा होंगे।   ट्रैक्टरों पर यूनियन के झंडों के साथ पोस्टर होंगे जिन पर ” किसान एकता जिंदाबाद , किसान नहीं तो भोजन नहीं ”  आदि नारे होंगे।

आपको बता दे की दिल्ली बॉर्डर पर अब तक हज़ारों की संख्या में ट्रैक्टर पहुंच चुके है।  किसान घरों से ट्रैक्टरों में जरूरी राशन का सामान साथ में लेकर आ रहे हैं। किसान नेता भी परेड की तैयारिओं को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।  यहां तक की पंजाब में पेट्रोल पंप मालिक फ्री में पेट्रोल दे रहे हैं।

दिल्ली में 26-जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड की तैयारिओं को लेकर किसान संगठनों ने पूरी ताकत लगा दी है।  पंजाब और हरयाणा में काफी संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली बॉर्डर पर पहुंच चुके हैं।  इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

आपको बता दे की अभी सरकार और किसानों के बीच सिर्फ दो बातों पर सहमति बन पाई है।  दो मांगो  पर अभी भी किसान अड़े हुए है।

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