The migration of migrant laborers

एक बार फिर से प्रवासी मज़दूरों के पलायन ने बढ़ाई चिंता

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महाराष्ट्र (पंजाब 365 न्यूज़ ) :यहाँ कोरोना ने देश की कमर तोड़ कर रखी हुई है वहीं प्रवासी मजूरों के पलायन ने सरकार की चिंता एक बार फिर से बढ़ा दी है। जब बीते वर्ष लॉक डाउन लगा था तो सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मज़दूरों को ही झेलनी पड़ी थी। जो अपने घरों से दूर अपने परिवारों को छोड़कर शहर में कमाने चले जाते हैं ,लेकिन जब से कोरोना महामारी ने पुरे विश्व में दस्तक दिया है प्रवासी मज़दूरों के लिए घटक सिद्ध हुआ है। जब भी लॉक डाउन की स्थिति पैदा होती है तो मज़दूर सोचते हैं जल्द से जल्द घरों को वापिस चले जयें ताकि वो लोक् डाउन में कहीं शहर में ही न फसे रहे।
ऐसी ही गम्भर स्तिथि फिर से पैदा ह रही है। 2020, में देख की इसी लोखड़ों की वजह से बहुत से मज़दूरों ने अपनी जान गवां दी थी। जबकि सरकार ने कहा था की जो यहां ही वहीँ रहे लेकिन पफीर भी मज़दूरों ने पलायन नहीं रोका था।


अब महारष्ट्र में भी कोरोना के मामले बढ़ने के कारण हालात एक बार फिर से गंभीर होते जा रहे हैं। राज्य सरकार ने हालात से निपटने के लिए लॉज डाउन लगाने के संकेत दिए हैं। कोरोना की बढ़ रही रफ्तार और लॉक डाउन के संकेतों ने प्रवासी मज़दूरों की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ा दी हैं।
जब की कई राज्यों के प्रवासी मज़दूर उत्तर प्रदेश और विहार की तरफ पलायन भी करने लग पड़े हैं। ओवरलोड हुई ट्रेन और बसों से वो अपने अपने घरों को वापिस लौट रहे हैं। प्रवासियों ने बताया की हम नहीं चाहते की पिछली बार की तरह हमे हीर से उसी तरह की स्तिथि का सामना करना पड़े इसलिए हम वक़्त रहते ही अपने अपने घरों को निकल रहे हैं।


आपको बता दे की पिछली बार पलायन के वक़्त बहुत से मज़दूरों ने अपनी जान गवां दी थी। मज़दूरों ने न धुप देखी न छांव बस अपने घरो की तरफ चलते गए जिन्हे जो रास्ता दिखा उसी रस्ते पर चल दिए। किसी के पास जूते नहीं थे तो किसी के पास खाना नहीं था खाने को। कई मज़दूर ट्रैन से भी कट कर अपनी जान गवां गए और कई मज़दूरों से भरे ट्रैक्टर पलट गए जिस से भी काफी मज़दूरन की जान चली गयी थी।
बस इसी डर से अब मज़दूर अपने घरों की तरफ पलायन कर रहे है ताकि वो बिता वक़्त फिर से न देखना पड़े।

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