PM- Modi urged farmers to end farmer movement

PM- मोदी ने किसानों से किया आग्रह कि किसान आंदोलन ख़त्म करें ,PM- ने कहा की MSP-था और MSP-हमेशा रहेगा

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नई दिल्ली (पंजाब 365 न्यूज़ ) : कृषि कानूनों के विरोध में 70- दिन से ज्यादा हो गए है। लेकिन किसान कृषि कानूनों के विरोध में डटे हुए हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने राजयसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा पर सदन को सम्बोधित करते हुए किसानों और कृषि कानूनों की जरूरत पर अपनी सपष्ट बात रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों से अपना आंदोलन समाप्त कर कृषि सुधारों को एक मौका देने का आग्रह करते हुए कहा की ये समय खेती को खुशहाल बनाने का है और देश को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की अभी तक जितनी भी सरकारें आयी है वह बड़े किसानों को तो लाभ पहुँचती ही है लेकिन छोटे किसान हमेशा उस किसान से वंचित रह जाते हैं। प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही किसानों को एक बार फिर से भरोसा दिलाया की MSP- था , है और MSP- आगे भी जारी रहेगा। देश का लोकतंत्र ऐसा नहीं की कोई भी खाल उधेड़ ले।
PM- मोदी ने आज राजयसभा में किसान आंदोलन पर अपने विचार रखे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को सम्वोधित करते हुए कहा की विपक्ष ने किसानों को समझाने की बजाए इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति की है। अब आंदोलन पर राजनीति हावी हो रही है। कांग्रेस का नाम लिए बिना ही PM- मोदी ने कहा की कुछ लोगो ने अचानक इस मुद्दे पर U-टर्न ले लिया , जिस से मुझे हैरानी हुई है।
PM- ने कहा की कृषि कानून के जरिये मंडियों को और मजबूत करने का काम किया जा रहा है। PM- ने साफ़ -साफ़ कहा की किसी के वाहकावे में आने की जरूरत नहीं है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान PM- मोदी ने किसान आंदोलन , कृषि कानून , कोरोना वायरस पर बात की। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर जमकर हमला किया। उन्होंने ये ही बोला की विपक्ष को भी किसानों को समझाना चाहिए क्योकि विपक्ष भी कई बार कृषि कानूनों का समर्थन कर चुकी है। PM- मोदी ने ये भी कहा की पंजाब के किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने सदन में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का कथन पढ़ा, ‘हमारी सोच है कि बड़ी मार्केट को लाने में जो अड़चने हैं, हमारी कोशिश है कि किसान को उपज बेचने की इजाजत हो।’


PM- मोदी के भाषण की बड़ी बातें :

  • पीएम किसान सम्मान निधि योजना से सीधे किसान के खाते में मदद पहुंच रही है। 10 करोड़ ऐसे किसान परिवार हैं जिनको इसका लाभ मिल गया। अगर बंगाल में राजनीति आड़े नहीं आती, तो ये आंकड़ा उससे भी ज्यादा होता। अब तक 1 लाख 15 हज़ार करोड़ रुपये किसान के खाते में भेजे गये हैं।
  • हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पंजाब के साथ क्या हुआ। इसे विभाजन के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। यह 1984 के दंगों के दौरान सबसे ज्यादा रोया था। वे सबसे दर्दनाक घटनाओं के शिकार हुए। जम्मू-कश्मीर में मासूमों की हत्या कर दी गई। हथियारों का कारोबार उत्तर पूर्व में किया जाता था। इन सबने राष्ट्र को प्रभावित किया।
  • राष्ट्र प्रगति कर रहा है और हम FDI के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन मैं देख रहा हूं कि एक नया एफडीआई सामने आया है। हमें इस नए FDI से राष्ट्र की रक्षा करनी है। हमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आवश्यकता है, लेकिन नया एफडीआई ‘विदेशी विनाशकारी विचारधारा’ है, हमें इससे खुद को बचाना होगा।
  • मनमोहन सिंह जी ने किसान को उपज बेचने की आज़ादी दिलाने, भारत को एक कृषि बाज़ार दिलाने के संबंध में अपना इरादा व्यक्त किया था और वो काम हम कर रहे हैं। आप लोगों को गर्व होना चाहिए कि देखिए मनमोहन सिंह जी ने कहा था वो मोदी को करना पड़ रहा है।
  • दूध उत्पादन किन्हीं बंधनों में बंधा हुआ नहीं है। दूध के क्षेत्र में या तो प्राइवेट या को-ऑपरेटिव दोनों मिलकर कार्य कर रहे हैं। पशुपालकों जैसी आज़ादी, अनाज और दाल पैदा करने वाले छोटे और सीमांत किसानों को क्यों नहीं मिलनी चाहिए।
  • कोरोना काल में दुनिया में लोग निवेश के लिए तरस रहे हैं लेकिन भारत में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। तथ्य बता रहे हैं कि अनेक देशों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है जबकि दुनिया भारत में डबल डिजिट ग्रोथ का अनुमान लगा रही है।
  • सोशल मीडिया पर देखा होगा फुटपाथ पर छोटी झोपड़ी लगाकर बैठी एक बुढ़ी मां अपनी झोपड़ी के बाहर दीया जलाकर भारत के शुभ के लिए कामना कर रही है। हम उसका मजाक उड़ा रहे हैं, उस भावना का मखौल उड़ा रहे हैं।
  • अच्छा होता कि राष्ट्रपति जी का भाषण सुनने के लिए सब होते तो लोकतंत्र की गरिमा और बढ़ जाती। लेकिन राष्ट्रपति जी के भाषण की ताकत इतनी थी कि न सुनने के बाद भी बात पहुंच गई।
  • हम आज़ादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, ये एक प्रेरक अवसर है। हम जहां हों, मां भारती की संतान के रूप में आज़ादी के 75वें पर्व को हमें प्रेरणा का पर्व मनाना चाहिए।
    भारत के लिए दुनिया ने बहुत आशंकाएं जताई थीं। विश्व बहुत चिंतित था कि अगर कोरोना की इस महामारी में भारत अपने आप को संभाल नहीं पाया तो न सिर्फ भारत, पूरी मानव जाति के लिए इतना बड़ा संकट आ जाएगा, ये आशंकाएं सभी ने जताई।
  • लोकतंत्र को लेकर काफी उपदेश दिए गए हैं। मैं नहीं मानता कि जो बातें बताई गई हैं देश का कोई भी नागरिक उन पर भरोसा करेगा। भारत का लोकतंत्र ऐसा नहीं है जिसकी खाल हम इस तरह से उधेड़ सकते हैं, ऐसी गलती हम न करें।
  • हमारा लोकतंत्र किसी भी मायने में वेस्टर्न इंस्टीट्यूशन नहीं है। ये एक ह्यूमन इंस्टीट्यूशन है। भारत का इतिहास लोकतांत्रिक संस्थानों के उदाहरणों से भरा पड़ा है। प्राचीन भारत में 81 गणतंत्रों का वर्णन मिलता है।
  • शरद पवार, कांग्रेस और हर सरकार ने कृषि सुधारों की वकालत की है कोई पीछे नहीं है। मैं हैरान हूं अचानक यूटर्न ले लिया। आप आंदोलन के मुद्दों को लेकर इस सरकार को घेर लेते लेकिन साथ-साथ किसानों को कहते कि बदलाव बहुत जरूरी है तो देश आगे बढ़ता।

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