कैसे हुई अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत ,जानिये इसका इतिहास, थीम और सभी जरूरी बातें

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(International Women’s Day) ( पंजाब 365 न्यूज़ ) : महिलाएं एक ऐसी शक्ति है जो किसी को भी साहस देकर फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती है।एक पुरुष की सफलता (Success) में एक महिला का बहुत बड़ा योगदान होता है. महिला अपने परिवार की खुशियों के लिए न जाने कितने त्याग करती है. इतना ही नहीं, आज के समय में महिलाओं (Women) ने खुद को बेहद सशक्त बना लिया है. महिलाएं अपनी घर गृहस्थी के साथ तमाम क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. साथ ही घर और वर्कप्लेस, दोनों की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं. महिलाओं के त्याग, समर्पण और क्षमताओं को सम्मान देने के लिए हर साल 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जाता है. महिलाओं के योगदान की वैसे तो हर दिन ही सराहना की जानी चाहिए लेकिन फिर भी उनके योगदान और सम्मान में एक खास दिन निर्धारित किया गया है, हर वर्ष 8 मार्च का दिन दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ( International Women’s Day ) के तौर पर मनाया जाता है।कहते हैं कि दुनिया की महिलाओं के बिना कल्पना करना भी मुश्किल है. आज के समय में महिलाएं देश और समाज दोनों के निर्माण में बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं. अब पहले की तरह महिलाएं केवल घर की चारदीवारी के अंदर बंद नहीं हैं. वह आज घर से बाहर निकलकर अपने हुनर को लोगों के सामने पेश कर रही हैं और समाज में एक सम्मान का स्थान प्राप्त कर रही है. महिला अपने परिवार और समाज का जिस तरह ध्यान रखती है उसे जज्बे को सलाम करने के लिए हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. इस दिन को महिलाओं के समर्पण, उपलब्धियों और कामयाबी के जश्न के रूप में मनाया जाता है. ये दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है। इस दिन को महिलाओं की आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक तमाम उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। साथ ही उन्हें यह ऐहसास कराया जाता है कि वह हमारे लिए कितनी खास हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले 1909 में मनाया गया था। इसे आधिकारिक मान्यता तब दी गई जब 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने थीम के साथ इसे मनाना शुरू किया। आज के दिन यानी 8 मार्च को भारत समेत पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. इस दिन दुनिया के बहुत से देशों में महिलाओं की उपलब्धि को सराहा जाता है और कई तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

ये ले आज के दिन संकल्प :
आज महिलाएं आत्मनिर्भर बन गई हैं। हर क्षेत्र में वह मिसाल कायम कर रही हैं। लेकिन कई बार उन्हें समाज में लैंगिक असमानता का व्यवहार झेलना पड़ता है। ऐसे में इस दिन महिलाओं के प्रति समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता को खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए। यह बात सही है कि महिलाएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है। लेकिन यह भी कटु सत्य है कि आज भी कई जगहों पर उन्हें लैंगिक असमानता, भेदभाव झेलना पड़ता है। कन्या भ्रूण हत्या के मामले आज भी आते हैं। महिला के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हमारा यह कत्तर्व्य है हम महिलाओं की स्थिति समाज में बेहतर बनाने को लेकर प्रयासरत रहने का संकल्प लें।


महिला दिवस का यह है इतिहास :
आपको बता दें कि साल 1908 में अमेरिका में 8 मार्च को 15,000 से अधिक महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए सड़क पर आंदोलन किया था. यह सभी महिलाएं कामकाजी थी और उनकी मांग थी कि उनके काम के घंटे कम किए जाएं और उनके वेतन में भी बढ़ोतरी की जाए. इसके साथ ही उन्हें समाज में बराबरी का स्थान देते हुए मतदान का भी अधिकार दिया जाए. इस आंदोलन की आवाज सरकार तक पहुंची. इसके बाद साल 1909 में अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने इसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की. इसके बाद साल 1917 में पहले विश्व युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने भी ब्रेड और पीस के लिए आंदोलन किया. इसके बाद राजा निकोलस ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया. इस कारण साल 1975 में यूनाइटेड नेशंस ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने की शुरुआत कर दी।


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने पीछे का कारण और महत्व :
समय के साथ महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आया है लेकिन आज भी महिलाएं भेदभाव का शिकार है. आज भी समाज को महिलाओं के लिए ज्यादा काम करने की जरूरत हैं. महिलाओं की स्थिति को सही करने के लिए और समाज को जागरूक करने के लिए हर साल दुनिया भर की तमाम सरकारे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का खास दिन सेलिब्रेट करती है।


इस बार की थीम :
हर साल महिला दिवस किसी ना किसी थीम पर आधारित होता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022 (IWD 2022) की थीम ‘जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो’ यानी मजबूत भव‍िष्‍य के ल‍िए लैंग‍िक समानता जरूरी है।

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