Breaking news : किसानों ने दिए सरकार के साथ बातचीत के संकेत , क्या इस अहम बैठक में किसान मानेंगे सरकार का कोई सुझाब

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नई दिल्ली (पंजाब 365 न्यूज़) : गणतंत्र दिवस पर कल ट्रैक्टरों से किसानो ने ट्रेक्टर मार्च निकला था। पुलिस और किसानों के बीच 37- बातों पर सहमति बनने   के बाद ही किसानों को ट्रैक्टर मार्च की अनुमति मिली थी। लेकिन कुछ उपद्रवियोन ने पुरे किसान आंदोलन को बदनाम कर दिया।  कल कुछ लोगो ने ट्रैक्टर परेड में  जम कर बबाल किया और  पूरी दिल्ली में दंगों जैसा माहौल हो गया था। दो महीने हो चुके है किसानों का बॉर्डर पर आंदोलन करते हुए लेकिन तीन कृषि कानूनों पर अभी तक बात नहीं बनी।

 और अब किसान यूनियन के नेताओं का कहना  है  की जो भी कल दिल्ली में बबाल हुआ हमारे आंदोलन का उस से कुछ लेना देना नहीं है। जिन भी उपद्रवियो ने ये किया वह हमारे मोर्चे का हिस्सा नहीं थे। बल्कि किसान संगठनों के नेतों ने सरकार पर आरोप लगाया की ये सरकार की ही सोची समझी चाल थी हमारे आंदोलन को बदनाम करने की। किसानों ने बैरिकेट तक तोड़ दिए जिसके कारण पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और किसानो और पुलिस में झड़प हो गयी। कल की हिंसा में 80- से ज्यादा पोलिसकर्मिओं  के जख्मी होने की खबर है। और तो और कुछ ट्रैक्टर मार्च वालों ने तो लाल किले पर जाकर गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगे के साथ जाकर अपना आंदोलनकारी झंडा लगा दिया।  जिस से देश में झंडे की गरिमा को चोट पहुंची है।

 केंद्र सरकार के साथ बीते दिन हुए बैठक के बाद आज किसान नेताओं की बैठक होनी है। जिसके   बाद किसान नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।  सिंधु बॉर्डर पर दोपहर 12- बजे के करीब किसान नेताओं की बैठक होनी है।  सरकार ने कुछ ही दिन पहले किसानों के सामने एक से डेड साल तक कृषि कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव किसानों के सामने रखा था।  तब किसान नेताओं ने कहा था की ये प्रस्ताव सरकार की तरफ से आया है।  हम किसान यूनियन इस पर चर्चा कर के सरकार को अपना निर्णय सुना देंगे।

अब देखना ये बनता है की की सरकार पुलिस और किसानों के बीच कोई बात बनती है की नहीं।  ये तो बैठक के बाद ही पता चलेगा।

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