As soon as all the Shaktipeeths of Himachal were opened

हिमाचल के सभी शक्तिपीठ खुलते ही लगे भक्तों के जयकारे ,हज़ारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

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हिमचाल (पंजाब 365 न्यूज़ ) : करोना महामारी के चलते हिमाचल सरकार ने सभी शक्तिपीठ बंद कर दिए थे। लेकिन अब जो भी जाना चाहता है हिमाचल में शक्तिपीठों के दर्शन करने उनके लिए खुशखबरी ये है की अब हिमाचल आज से पूरी तरह अनलॉक हो गया है। विख्यात शक्ति पीठ माता चिन्तपूर्णी के कपाट लगभग 69 दिन बाद वीरवार से खुल गए हैं। मंदिर खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं की लम्बी-लम्बी कतारें बाजार में लगना शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं में दर्शनों के लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। मन्दिर में दर्शनों के लिए प्रशासन ने दर्शन पर्ची की व्यवस्था की है। बिना दर्शन पर्ची के मन्दिर में प्रवेश नही हो पा रहा है। मन्दिर में हल्वा चढ़ाने पर प्रतिबंद हैं मात्र मन्दिर में सूखा प्रशाद ही चढ़ रहा हैं। पुजारी साहिल कालिया ने कहा मन्दिर के कपाट खुल गए हैं इसके अलावा उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कोविड नियमों का पालन करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर में बंद पड़े सभी शक्तिपीठ बज्रेश्वरी, ज्वालामुखी, मां चामुंडा और नयनादेवी मंदिर के कपाट सहित अन्य धार्मिक स्थल करीब तीन माह बाद वीरवार को पहली जुलाई से यानी आज से श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। श्रद्धालुओं को कोरोना को लेकर जारी एसओपी का पालन करना होगा। नयनादेवी को छोड़कर सभी शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं को सूखा प्रसाद चढ़ाने की छूट रहेगी।
श्रद्धालु मां के दरबार हाजिरी भी लगा सकेंगे और गर्भ गृह तक जाकर दर्शन भी कर सकेंगे।

इससे पहले कोविड-19 कर्फ्यू के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं का प्रवेश करना वर्जित कर दिया था। यही नहीं गर्भ गृह तक नहीं जा सकते थे, प्रसाद नहीं चढ़ा सकते थे और गेट से ही माथा टेककर लौटना पड़ रहा था। सरकार ने पहली जुलाई से प्रदेश के सभी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पूजा अर्चना को खोलने का फैसला लिया है। जिससे न केवल श्रद्धालु खुश हैं, बल्कि मंदिर के आस पास सामान बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले दुकानदार व पुजारी वर्ग भी काफी खुश है।

मां ज्वालामुखी, मां चामुंडा नंदिकेश्वर धाम, मां बज्रेश्वरी कांगड़े वाली माता के दरबार को श्रद्धालुओं केलिए अप्रैल माह से पूरी तरह से बंद कर दिया था। यहां पर सिर्फ पुजारियों को ही पूजा करने की इजाजत थी। लेकिन अब फिर से पहले जैसे श्रद्धालु मां के गर्भ गृह में जाकर दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालु अपने साथ मंदिरों में प्रसाद ले जा सकेंगे, लेकिन अभी तक भजन, कीर्तन व लंगर व्यवस्था पर रोक रहेगी। अब मंदिर परिसर में श्रद्धालु मुंडन आदि भी करवा सकेंगे।


इन चीज़ों पर रहेगा प्रतिबंध :
धार्मिक स्थलों में हवन, यज्ञ, कन्या पूजन, कीर्तन, लंगर लगाने पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा श्रद्धालुओं को मंदिरों में बैठने, ज्यादा देर खड़े रहने की मनाही होगी। पुजारी न प्रसाद बांटेंगे और न किसी को मौली बांधेंगे। सरकार के इस फैसले से जहां श्रद्धालु अब तसल्ली से मंदिरों में देवी-देवताओं के दर्शन कर सकेंगे। भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से 22 जून को जारी आदेशों के तहत ही व्यवस्था होगी। हालांकि इन आदेशों को संबंधित डीसी स्थानीय स्थिति व जरूरत के हिसाब से संशोधित कर सकेंगे।

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