Is Congress discord tantamount to

क्या कांग्रेस की कलह से ISI और पाकिस्तान को फायदा पहुंचाने जैसा है ?

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पंजाब (पंजाब 365 न्यूज़ ) : कांग्रेस की कलह ऐसी है की खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। अलह की वजह से ही नवजोत सिंह सिद्धू को प्रधान पद दिया गया और जब सिद्धू और कैप्टन की नहीं आपस की कलह सलझी तो कैप्टन ने भी CM, पद से इस्तीफ़ा दे दिया। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई पंजाब में बड़ा फेरवदल तब हुआ जब कांग्रेस की तरफ से 74- साल बाद दलितों की याद ने सबको चौंका दिया। पंजाब में चरणजीत चन्नी के CM बनते ही कांग्रेस की सियासत में नया मोड़ आ गया। आपसी कलह के बीच औरों का ही फायदा होता है ये अभी तक कांग्रेस को समझ नहीं आया है। जब तक इनको समझ आएगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। आपको ता दे की पंजाब की कलह पकिस्तान में बैठे नेता इस पर चुलकी लेने से भी बाज़ नहीं आ रहे है। लोगो को एक मुद्दा मिल जाता है बात करने का।
इसी बीच पंजाब की कांग्रेस सरकार में चल रहे संकट को लेकर अब वरिष्ठ कांग्रेसी कपिल सिब्बल ने नाराजगी जताई है। पार्टी की लीडरशिप पर सवाल उठा चुके सिब्बल ने कहा, ‘कांग्रेस का कोई इलेक्टेड प्रेसिडेंट नहीं है, पर फैसला कोई न कोई तो ले ही रहा है ना। गलत हो, सही हो.. ये चर्चा वर्किंग कमेटी में होनी चाहिए। लोग पार्टी छोड़कर क्यों जा रहे हैं, ये सोचने की जरूरत है।’

सिब्बल ने कहा, ‘हम G-23 हैं, निश्चित तौर पर जी हुजूर-23 नहीं हैं। हम मुद्दे उठाते रहेंगे। मैं आपसे कांग्रेस के उन लोगों की तरफ से बात कर रहा हूं, जिन्होंने पिछले साल अगस्त में CWC और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी को चिट्ठी लिखकर पार्टी अध्यक्ष का चुनाव कराने की मांग की थी। हम पार्टी नेतृत्व की तरफ से अब भी उस पर एक्शन लिए जाने का इंतजार कर रहे हैं।’
हमारी पार्टी में कोई अध्यक्ष नहीं है, इसलिए हम नहीं जानते कि ये फैसले कौन ले रहा है। हालांकि, हमें मालूम है, लेकिन तब भी हम यह बात नहीं जानते। हमारे सीनियर साथियों में से किसी ने तुरंत CWC की मीटिंग बुलाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष को या तो चिट्ठी लिखी है या जल्दी लिखी जाने वाली है। इससे हमें पार्टी के हालात पर बात करने का मौका मिलेगा। हम यह जान सकेंगे कि अभी पार्टी कहां खड़ी है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सोनिया गांधी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नवी आजाद ने चिट्‌ठी लिखी है।
पंजाब की सियासत में आए उलटफेर के बाद कपिल सिब्बल को रहा नहीं गया और उन्होंने आलाकमान पर बगावती तंज कर दिया. कपिल सिब्बल ने सवाल उठा दिए कि अभी पार्टी में कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं है तो आखिर ये फैसले कौन ले रहा है. आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि बड़े-बड़े दिग्गज पार्टी छोड़कर जा रहे हैं. कपिल सिब्बल की चिंता भी जायज है, इसलिए क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद जैसे नेता पार्टी छोड़कर चले गए, कैप्टन अमरिंदर सिंह भी करीब-करीब इसी राह में हैं. पार्टी छोड़कर जाने वालों की लिस्ट तो लंबी है लेकिन बड़े चेहरों का जाना पार्टी के क्रियाकलापों पर प्रश्न जरूर खड़े कर रहा है, कि क्या वाकई आलाकमान पार्टी के बड़े नेताओं को तवज्जो नहीं देती है? क्या कांग्रेस की परिभाषा परिवारवाद से ही जानी जाती है?
कांग्रेस के धुरंधर कैप्टन अमरिंदर सिंह का इस्तीफा और दिल्ली में अमित शाह से मिलना इस बात का संकेत है कि पार्टी किसी ईमानदार नेता और कार्यकर्ता के साथ नहीं चलेगी बल्कि अपने हिसाब और अपने फायदों को देखकर ही चलेगी. बात अगर बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल नवजोत सिंह सिद्धू की करें तो कांग्रेस को उनपर भी पूरी तरह से भरोसा नहीं है. पार्टी ने सिद्धू को भले ही पंजाब का अध्यक्ष बना दिया हो लेकिन उनके तौर तरीकों से साफ लगता है कि सिद्धू पर पार्टी लगाम कसना चाह रही है. ऐसे में ये भी सवाल उठते हैं कि आखिर कांग्रेस चाहती क्या है।
लाल निशान छोड़ कन्हैया कुमार कांग्रेसी जरूर बन गए हैं, लेकिन वो कांग्रेस के खेवनहार साबित भी होंगे इस पर शंका है. क्योंकि कोई भी नेता अपने इलाके और समाज के हिसाब से ही अपने वोटों का फायदा देखते हुए कुछ करना चाहता है. कन्हैया कुमार जैसे नेता जिन पर देशद्रोही नारों के आरोप लग चुके हैं, उनपर 10 जनपथ का रवैया ही ये तय करेगा कि वह पार्टी के लिए कितने बड़े खेवनहार साबित होंगे और उसे कहां तक ले जाएंगे. अभी तक के हालात से तो साफ है कि पार्टी के फैसलों ने बड़े-बड़े नेताओं को खो दिया है. ऐसे में आलाकमान एजेंडा क्या सेट करेगा. हाल तो अभी यही है कि वो तो अंतर्कलह मिटाने में भी नाकाम साबित हुआ है।

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