International Yoga Day 2021: Let us know the history

International Yoga Day 2021 : आइये जाने योग का इतिहास और जिंदगी में महत्त्व

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International Yoga Day 2021 (पंजाब 365 न्यूज़ ) : कहते है हमारा स्वास्थ्य ही हमारा असली धन है। इसलिए हमे योग के द्वारा इसे बनाये रखना चाहिए। एक योग ही है जिससे के द्वारा हम हर प्रकार की बिमारियों से बचे रह सकते हैं। स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है ,संतोष सबसे बड़ा धन है ,और योग वो साधन है जिस से ये दोनों मिलते है। आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी से लड़ रहा है तो योग उम्मीद की एक किरण बना है। आज दुनिया सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। 21 जून की तारीख ने पिछले कुछ ही बरस में इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। भारत की पहल पर शुरू हुए इस खास दिन को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में खासा उत्साह है। आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है, पीएम मोदी ने पूरी दुनिया को योगा फॉर वेलनेस का महत्व बताया साथ ही ये बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि आज दुनिया को भारत ने एम योगा एप का तोहफा दिया है। शरीर को निरोग रखने में योग का महत्वपूर्ण योगदान है और ये भारत ने ही पूरी दुनिया को बताया है. योग रखे निरोग का संदेश आज पूरी दुनिया जानती है. आज की तारीख भी खास है, आज यानि 21 जून को पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है. 21 जून की इस तारीख ने पिछले कुछ ही बरस में भारत के साथ ही विश्व के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है. आज से छह वर्ष पहले योग को महत्वपूर्ण मानते हुए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में आज के दिन को इतिहास में दर्ज किया गया और तब से ही हर साल इस दिवस को योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
भारत के ऋषियों ने, भारत ने जब भी स्वास्थ्य की बात की है, तो इसका मतलब केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं रहा है। इसीलिए, योग में फ़िज़िकल हेल्थ के साथ साथ मेंटल हेल्थ पर इतना ज़ोर दिया गया है। योग हमें स्ट्रेस से स्ट्रेंथ और नेगेटिविटी से क्रिएटिविटी का रास्ता दिखाता है। योग हमें अवसाद से उमंग और प्रमाद से प्रसाद तक ले जाता है।
कब हुई इसकी शुरुआत :;
विश्व योग दिवस की शुरुआत तो 21 जून 2015 से हुई थी. लेकिन योग का इतिहास हज़ारों साल पुराना है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार योग का ज्ञान सबसे पहले सूर्य को ब्रह्मा जी ने दिया था. हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार योग की उत्पत्ति ब्रह्मा जी ने की थी. इसके बाद सूर्य से ये ज्ञान नारद मुनि को मिला और नारद मुनि ने योग का ज्ञान पृथ्वी पर मनु को दिया. इसके बाद पृथ्वी पर धीरे धीरे योग का प्रचार प्रसार हुआ. आपको बता दें भगवान श्रीकृष्ण ने भगवदगीता में अर्जुन को विभिन्न प्रकार के योग करने की सलाह दी थी. भगवत गीता में 18 प्रकार के योग बताए गए हैं. महर्षि पतंजलि ने भी ‘योगसूत्र’ नाम की एक पुस्तक लिखी है, इस पुस्तक को लेकर ये मान्यता है कि ये 2200 साल पहले लिखी गई थी.
इस दिवस की शुरुआत तब हुई जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया और देखते ही देखते दुनिया के तमाम देश इस मुहिम में शामिल हो गए हैं. बता दें कि 21 जून के दिन की एक खासियत है कि यह वर्ष के 365 दिन में सबसे लंबा दिन होता है और योग के निरंतर अभ्यास से व्यक्ति को लंबा जीवन मिलता है इसलिए इस दिन को योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया गया।

हुई M-YOGA, की शुरुआत :
PM मोदी ने कहा कि जब भारत नें संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था तो उसके पीछे ये ही भावना थी कि योग विज्ञान पूरे विश्व के लिए सुलभ हो. इस दिशा में भारत ने संयुक्त राष्ट्र, WHO के साथ मिलकर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है.अब विश्व को M-Yoga एप की शक्ति मिलने जा रही है. मुझे पूरा विश्वास है M-Yoga ऐप योग का विस्तार दुनियाभर में करने और ‘वन वर्ड वन हेल्थ’ के प्रयासों को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

PM मोदी ने ट्वीट करके दी थी जानकारी :
अपने संबोधन की जानकारी पीएम मोदी ने रविवार की शाम खुद ट्वीट करके दी थी। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा था- ‘कल 21 जून को हम 7वां योग दिवस मनाएंगे। इस साल का थीम ‘तंदुरुस्ती के लिए योग’ है, जो शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती के लिए योगाभ्यास पर केंद्रित है।’ उन्होंने कहा, ‘लगभग 6.30 बजे सुबह योग दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करूंगा।’

कोरोना के बावजूद इस बार की योग दिवस की थीम ‘योग फॉर वेलनेस’ ने करोड़ो लोगों में योग के प्रति उत्साह को और बढ़ाया. मैं आज योग दिवस पर ये कामना करता हूं कि हर देश हर समाज और हर व्यक्ति स्वस्थ हो. सब एकसाथ मिलकर एक दूसरे की ताकत बनें.

करोना के अदृश्य वायरस ने जब दुनिया में दस्तक दी थी तब कोई भी देश साधनों से सामर्थ्य से और मानसिक अवस्था से इसके लिए तैयार नहीं था. ऐसे कठिन समय में योग आत्मबल का एक बड़ा माध्यम बना. योग ने लोगों में ये भरोसा बढ़ाया कि हम इस बीमारी से लड़ सकते हैं।

भारतीय संस्कृति की अमूल्य
और विलक्षण धरोहर एवं मानव के
उत्तम स्वास्थ्य का आधार योग है

बाबा रामदेवः

बाबा रामदेव ने पूरी दुनिया में अनुलोम-विलोम और कपालभाति का काफी प्रचार प्रसार किया है। बाबा रामदेव ने पूरी दुनिया को इस बात का एहसास कराया है कि योग सिर्फ रोगियों के लिए नहीं,बल्कि आम आदमी के लिए भी है।

परमहंस योगानंदः

पश्चिमी दुनिया को मेडिटेशन और योग क्रियाओं से परमहंस योगानंद ने ही परिचित कराया था. परमहंस योगानंद का संबंध रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की शिष्य परंपरा से है।

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