Guru Ravidas Jayanti 2022:

गुरु रविदास जयंती 2022 : जालंधर के बूटा मंडी में आज सज चूका है भव्य मंदिर

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जालंधर ( पंजाब 365 न्यूज़ ) : देशभर में आज (16 फरवरी) गुरु रविदास जी की जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई जा रही है। वहीं बात करे जालंधर की तो जलधर का बुट्टा मंडी दुल्हन की तरह तीन दिनों से सज़ा हुआ है मेले की चकाचौंध चार चाँद लगा रही है। पूरे भारत में जालंधर के बुट्टा मंडी का संत रविदास का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। दूर दूर से लोग यहां आते हैं। बात करे संत रविदास जी की जयंती की तो हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस साल संत रविदास जयंती 16 फरवरी, बुधवार को है। संत रविदास को गुरु रविदास, रैदास व रोहिदास के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों में संत रविदास के जन्म को लेकर मतभेद है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि गुरु रविदास का जन्म सन् 1398 ई. में हुआ था। वहीं कुछ जानकार बताते हैं कि इनका जन्म सन् 1450 ई. में हुआ था। जानकारों का कहना है कि गुरु रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर गांव में माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था।
रविदास जयंती तिथि 16 फरवरी, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2022 को रात 09 बजकर 16 मिनट से और पूर्णिमा तिथि समाप्त 16 फरवरी को रात 1 बजकर 25 मिनट पर।


बात करे जालंधर के प्रसिद्ध संत गुरुदास जी के मेले की तो यहाँ हर प्रकार की छोटी से लेकर बड़ी दुकाने सजी हुई है जो लोगो के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में हज़ारों की संख्या में लोग नतमस्तक होने आते है।
रंग बिरंगे खिलोने ,,झूले ,खाने पिने की वस्तुएं बच्चों का ध्यान अपनी और आकर्षित करती है।
वहीँ पुलिस भी चप्पे चप्पे पर नज़र गड़ाए बैठी हुई है ताकि कोई शरारती तत्व कोई अनहोनी न करे।


मन चंगा तो कठौती में गंगा’
संत रविदास जी के द्वारा कहा गया यह कथन सबसे ज्यादा प्रचलित है। जिसका अर्थ है कि अगर मन पवित्र है और जो अपना कार्य करते हुए, ईश्वर की भक्ति में तल्लीन रहते हैं उनके लिए उससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है।

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच।
नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच।।

इसका अर्थ है कि ‘कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं बल्कि अपने कर्म के कारण होता है। व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं। संत रविदास जी सभी को एक समान भाव से रहने की शिक्षा देते थे।

रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम।।

संत रविदास जी कहते हैं कि जिस हृदय में दिन-रात राम का नाम रहता है, ऐसा भक्त राम के समान होता है। राम नाम जपने वाले को न कभी क्रोध आता है और न ही उस पर काम भावना हावी होती है।

हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस। ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास।।

दोहे का अर्थ है कि हरी के समान कीमती हीरे को छोड़कर अन्य की आशा करने वाले अवश्य नरक को जाएंगे। यानी प्रभु की भक्ति को छोड़कर इधर-उधर भटकना व्यर्थ है।

करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस
कर्म मानुष का धर्म है, सत् भाखै रविदास

गुरु रविदास जी कहते हैं कि ज्यादा धन का संचय, अनैतिकता पूर्वक व्यवहार करना और दुराचार करना गलत बताया है। इसके अलावा अंधविश्वास, भेदभाद और छोटी मानसिकता के घोर विरोधी थे।

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