AIDS Day: Know when

एड्स डे : जानिए कब से और क्यों मनाया जाता है ये दिन

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एड्स डे ( पंजाब 365 न्यूज़ ) : पूरा विश्व आज एड्स दिवस को मना रहा है। ये एक ऐसी जानलेवा बीमारी है धीरे धीरे घुन की तरह इंसान को खा जाती है। आज पुरे विश्व में इसकी छपे में बहुत से लोग है। ये एक लाइलाज बीमारी है जिसका एकमात्र उपचार सिर्फ सावधानी ही है। कई बार कई लोग एक से ज्यादा असुरक्षित योन सवंध बनाते है जिसके कारण अगर एक को HIV- होगा तो वो दूसरे को भी हो जाता है जिसके कारण आगे ऐसी ही कड़ी चलती रहती है। पूरा विश्‍व आज जिस एड्स दिवस को मनाता है, उसकी पहली बार कल्पना 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा की गई थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों डब्ल्यू.एच.ओ.(विश्व स्वास्थ्य संगठन) जिनेवा, स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। उन्होंने एड्स दिवस का अपना विचार डॉ. जोनाथन मन्न (एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के निदेशक) के साथ साझा किया, जिन्होंने इस विचार को स्वीकृति दे दी और वर्ष 1988 से 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। प्रारंभ में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था परन्तु बाद में पता चला कि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। जिसके बाद साल 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने एड्स का वैश्विक स्तर पर प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 से विश्व एड्स अभियान की शुरुआत की।
विश्व एड्स दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व रक्त दाता दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह, विश्व क्षय रोग दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व मलेरिया दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस, विश्व रोगाणुरोधी जागरूकता सप्ताह, विश्व रोगी सुरक्षा दिवस और विश्व चगास रोग दिवस के साथ चिह्नित 11 आधिकारिक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है।

विश्व एड्स दिवस एचआईवी/एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने और महामारी के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए दुनिया भर के लोगों को एक साथ लाता है। एचआईवी एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बना हुआ है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2020 में 3.77 करोड़ लोग एड्स के साथ जी रहे थे। एचआईवी के साथ रहने वाले सभी लोगों में से 16% को यह नहीं पता था कि उन्हें 2020 में एचआईवी है। 73 प्रतिशत की 2020 में एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी तक पहुंच थी।

प्रारंभ में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था परंतु बाद में पता चला कि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद साल 1996 में HIV/AIDS पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर कार्य करना शुरू किया।
जानिए क्या है HIV :
एचआईवी एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है। एड्स का पूरा नाम ‘एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ (acquired immune deficiency syndrome) है। यह एक तरह का विषाणु है, जिसका नाम HIV (Human immunodeficiency virus) है। इस रोग में जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है। जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में भी अक्षम होने लगता है। खास बात है कि ये बीमारी तीन चरणों (प्राथमिक चरण, चिकित्सा विलंबता होना और एड्स) में होती है।
हर किसी को हो सकती है ये जानलेवा बीमारी : सावधानी जरूरी
शुरुआती दौर में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था जबकि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है. इसके बाद साल 1996 में HIV/AIDS पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर काफी काम करना शुरू किया था।
HIV एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है. इसे मेडिकल भाषा में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस यानि एचआईवी के नाम से जाना जाता है. वहीं लोग इसे आम बोलचाल में एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम के नाम से जानते हैं. इसमें जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाता।

ध्यान रखने योग्य बाते :–
एचआईवी.जीओवी (HIV.Gov) के अनुसार, प्रारंभिक एचआईवी लक्षण आमतौर पर संचरण के एक से दो महीने के भीतर उत्पन्न होते हैं. हालांकि, वे एक्सपोजर के दो सप्ताह बाद ही आ सकते हैं. इसके अलावा, कुछ लोगों को एचआईवी होने के बाद शुरुआती लक्षणों का अनुभव नहीं हो सकता है. यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ये प्रारंभिक एचआईवी लक्षण सामान्य बीमारियों और स्वास्थ्य स्थितियों से भी जुड़े हैं. एचआईवी स्थिति के बारे में सुनिश्चित होने के लिए, परीक्षण विकल्पों (Test Options) के बारे में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (Health Service Provider) से बात करने पर विचार करें.

HIV का पता कैसे लगाएं
किसी व्यक्ति को एचआईवी है या नहीं, यह जानने का एकमात्र तरीका टेस्ट है. एचआईवी टेस्ट करवाना ही यह निर्धारित करने का एकमात्र तरीका है कि वायरस शरीर में है या नहीं. ऐसे ज्ञात जोखिम कारक हैं जो किसी व्यक्ति के एचआईवी संक्रमित करने की आशंका को बढ़ाते हैं. उदाहरण के लिए, जिन लोगों ने बिना कंडोम का इस्तेमाल किए एक से ज्यादा लोगों से यौन संबंध बनाएं हैं या एक ही सुई को साझा किया है वे अपने डॉक्टर से जांच करवाने का विचार कर सकते हैं।
कब और कहाँ मिला था पहला मामला :
1959 में कॉन्गो में मिला था पहला मामला
माना जाता है कि 19वीं सदी में पहली बार अफ्रीका के खास प्रजाति के बंदरों में एड्स का वायरस मिला। बंदरों से होते हुए यह बीमारी इंसानों में फैला है। दरअसल अफ्रीका के लोग बंदर को खाते थे, इसलिए कहा जाता है कि बंदर को खाने से वायरस ने इंसान के शरीर में प्रवेश किया होगा। 1959 में कांगो के एक बीमार आदमी की मौत के बाद उसके खून के नमूने में सबसे पहले HIV वायरस मिला था। माना जाता है कि वह पहला HIV संक्रमित व्यक्ति था। किंशास उस समय सेक्स ट्रेड का गढ़ था। इस तरह सेक्स ट्रेड और अन्य माध्यमों से यह बीमारी अन्य देशों में पहुंची।

1960 में यह बीमारी अफ्रीका से हैती और कैरिबियाई द्वीप में फैली। दरअसल औपनिवेशिक लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में हैती के लोग काम करते थे। जहां स्थानीय स्तर पर उनके द्वारा शारीरिक संबंध बनाए जाने से ये बीमारी दूसरों में फैली। जब वे अपने घरों को लौटे तो वायरस उनके साथ हैती पहुंचा। उसके बाद वायरस कैरिबिया से न्यूयॉर्क सिटी में 1970 के दौरान फैला और फिर अमेरिका से बाकी दुनिया में पहुंचा। वहीं 1980 के बाद काफी तेजी से पूरे विश्‍व में बहुत तेजी से फैली। तब से लेकर अब तक पूरे विश्‍व में लाखों लोग एड्स के कारण अपनी जान गवां चुके हैं।

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