Sartaj Bappi Lahiri of Disco Beats is no more

नहीं रहे डिस्को बीट्स के सरताज बप्पी लहरी : 69 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

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बप्पी लहरी स्पेशल ( पंजाब 365 न्यूज़ ) : देश के जाने माने संगीतकार बप्पी लहरी का निधन हो गया है। मुंबई के एक हॉस्पिटल में बप्‍पी लाह‍िड़ी ने अंतिम सांस ली. उनकी उम्र करीब 69 वर्ष थी। उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित क्रिटी केयर हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उन्हें तबीयत खराब होने के बाद मंगलवार को ही भर्ती किया गया था।बताया जा रहा है की वह 69 साल के थे और लगभग पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे। बीते सोमवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया लेकिन मंगलवार को उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां कई स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका निधन हो गया।

बप्पी लाहिड़ी को भारत का ‘गोल्ड मैन’ भी कहा जाता है। भारी भरकम सोने के जेवर से हमेशा लदे रहने वाले बप्पी लाहिड़ी खुद के लिए गोल्ड को लकी मानते थे। सोने के अलावा बप्पी लाहिड़ी के पास करोड़ों का बंगला और लग्जरी गाड़ियां भी थीं। बप्‍पी दा का जन्‍म 1952 में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में हुआ। उन्‍हें बचपन में ‘बापी’ नाम से बुलाते थे जिन्‍हें उन्‍होंने बाद में प्रोड्यूसर शोमू मुखर्जी के कहने पर ‘बप्‍पी’ कर दिया। इस तरह अलोकेश लाहिरी, बप्‍पी लाहिरी बने। बप्‍पी के माता-पिता का बंगाली सिनेमा में नाम था। लता मंगेशकर भांप गईं कि इस बच्‍चे में संगीत के प्रति गहरा लगाव है। उन्‍हीं के कहने पर बप्‍पी ने 5 साल की उम्र में तबला सीखना शुरू क‍िया। 11 साल की उम्र थी जब बप्‍पी लाहिरी ने अपनी पहली धुन बनाई। 20 की उम्र में बप्‍पी ने बंगाली फिल्‍म ‘दादू’ से बतौर म्‍यूजिक डायरेक्‍टर डेब्‍यू किया, मगर वह कलकत्‍ता (कोलकाता) तक सीमित नहीं रहना चाहते थे।

भारत पर छाने के लिए हिंदी सिनेमा में एंट्री जरूरी थी। बप्‍पी के सपने को पूरा करने के लिए उनके मां-बाप ने अपना कर‍ियर त्‍याग दिया। परिवार बॉम्‍बे (मुंबई) शिफ्ट हो गया। 1973 में मुखर्जी की फिल्‍म ‘नन्‍हा शिकारी’ से बप्‍पी दा ने हिंदी में डेब्‍यू किया। इस फिल्‍म के दो गाने साबित करते हैं कि बप्‍पी में कुछ तो बात थी। पहला मुकेश और सुषमा का गाया ‘तू ही मेरा चंदा, तू ही तारा’ और दूसरा आशा भोसले और किशोर कुमार की यॉडलिंग से सजा ‘तू मेरी मंजिल…।’ अगली फिल्‍म के लिए शोमू ने बप्‍पी के सामने एक शर्त रखी, वो ऐक्टिंग करेंगे। बप्‍पी दा हैरान थे मगर उन्‍होंने ऑफर कबूल लिया। ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ फिल्‍म में न सिर्फ बप्‍पी दा ने अभिनय किया, बल्कि गाने भी गाए।

बप्पी दा पिछले साल कोविड पॉजिटिव हो गए थे। इसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। म्यूजिक इंडस्ट्री में बप्पी लहरी को डिस्को किंग कहा जाता था। उनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी था। बप्पी लहरी म्यूजिक के साथ-साथ सोना पहनने के अंदाज को लेकर भी जाने जाते थे।
कल होगा अंतिम संस्कार :
बप्पी लहरी के परिवार वालों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार कल किया जाएगा। उनके बेटे बप्पा अभी अमेरिका में हैं और वह कल दोपहर तक मुंबई पहुंचेंगे। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आपको बता दे की बप्‍पी दा सिर्फ डिस्‍को और पॉप ही नहीं, हिंदुस्‍तानी और क्‍लासिकल पर भी बराबर अधिकार रखते थे। ‘बाजार बंद करो’ फिल्‍म में मुकेश से गवाया ‘मोहे कर दे बिदा…’ सुनिए। विदाई के इस गीत में बप्‍पी दा ने शहनाई से जो दर्दभरा भाव जगाया है, वह कलेजा चीर जाता है। 1974 में आई ‘एक लड़की बदनाम सी’ के ‘रहें ना रहें चाहें…’ में गजब का ऑर्कस्‍ट्रेशन है। 70 के दशक में बॉलिवुड पर आरडी बर्मन का जादू छाया हुआ था। उसी दरम्‍यान, 1975 में आई एक फिल्‍म ने पूरी इंडस्‍ट्री को मजबूर कर दिया कि वह बप्‍पी लाहिरी का टैलेंट पहचाने। वो फिल्‍म थी ‘जख्‍मी’।


बप्पी लहरी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था :

‘डिस्‍को डांसर’ शायद बप्‍पी दा और मिथुन चक्रवर्ती के करियर की सबसे बड़ी फिल्‍म रही। इस फिल्‍म का हर एक गाना सुपरहिट था। 1982 में आई इस फिल्‍म में हाई टेम्‍पो वाले कई गाने थे जो युवाओं के बीच आज भी लोकप्रिय हैं। इस फिल्‍म की रिलीज के साथ ही बप्‍पी दा ने एक ट्रेंड सेट कर दिया। नमक हलाल के ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची…’ से बप्‍पी दा ने अमिताभ बच्‍चन को नए स्‍टाइल में पेश किया। इसी फिल्‍म का ‘रात बाकी बात बाकी…’ की धुन बेहद आसान है मगर बीट्स झूमने को मजबूर करती हैं। 2013 में आई ‘द डर्टी पिक्‍चर’ में बप्‍पी ने ‘ऊ ला ला…’ गाने से एक बार फिर साबित किया कि कदम थिरकाने वाले गीत बनाने में उनका कोई मुकाबला नहीं।

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