The pressure of CM Captain to make

CM कैप्टन के पंजाब को नशा मुक्त करने के दाबे हो रहे हैं फेल जानिए कैसे ?

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पटियाला ( पंजाब 365 न्यूज़ ) : पंजाब से नशे को जड़ से खत्म करने के कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के प्रयास फेल होते दिखाई दे रहे हैं। ताजा आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि प्रदेश के नशा छुड़ाओ केंद्रों में 2.75 लाख से अधिक लोगों का इलाज तो चल ही रहा है, नशा छोड़ चुके लगभग 1.62 लाख लोग दोबारा नशा छुड़ाओ केंद्रों में पहुंचे हैं।
पंजाब भारत का एक ऐसा राज्य है, जहाँ ड्रग से जुड़े सबसे अधिक मामले सामने आते है. दूसरे राज्यों से तुलना कि जाये तो पंजाब नशीली दवाओं की लत और अन्य ड्रग से जुड़े मामलों में सबसे पहले आता है. पंजाब राज्य सरकार कई तरीके से इस मामले पर काम कर रहा है, ड्रग्स सप्लाई को कम करने और लोगों में जागरूपता फ़ैलाने के लिए सरकार पूर्ण रूप से तत्पर है ऐसा हमे बस हमे सुनने इ मिलता है जबकि असा इ आइए कुछ भी नहीं। पंजाब में इस वक्त यहां की नई पीढ़ी नशे में डूबी हुई है।हम अक्सर सुनते हैं की जो भी सरकार बनती है कहती है हम पंजाब से नशे को जड़ से खत्म कर देंगे। लेकिन असल ने ऐसा होता नहीं है। कई जगह हमे ऐसे केस देखने को मिलते है यहां छोटे छोटे बच्चे भी नशे में डूबे हुए हैं जिस से हमारी भावी पीढ़ी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
हमने कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी बहुत बार भाषणों में सुना है की हम पंजाब को नशा मुक्त क़र देंगे लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के अपने ही गाँव के लड़के नशे में डूबे हुए है चिट्टे का नशा करने के कारन हाल ही में वहां दो लड़को की मौत हो गयी है। अब बात सीधी कैप्टन सरकार पर जाती है की जो कहते हैं की हम पंजाब इ पूरी तरह नशा मुक्त बना देंगे वो पहले इस बात का जबाब दे की हले वो अपने ही गाँव को नशा मुक्त कब करवाएंगे पुरे राज्य की बात तो बाद में आती है।
पंजाब में इतना ज्यादा नशा है की आकड़ों के अनुसार
पंजाब के हर जिले में एक न एक नशा मुक्ति केंद्र और सेंटर्स होते ही है। किसलिए बनाये जाते है ये नशा मुक्ति केंद्र सरकार देगी इसका जबाब। हज़ारों की संख्या में वहां लोग अपने घर के चिरागों को छोड़ इ आते है ताकि वाहन रहकर उनके बच्चे नशे से मुक्ति पा सके।
अगर पंजाब नशा मुक्त हो जाये तो पंजाब में इन नशा मुक्त केंद्रों की आवश्यकता ही न पड़े।
बात सिर्फ यहाँ लड़को की ही नहीं हो रही है पंजाब की लड़किया भी नशे में चूर रहती है।

इन सर्वेक्षणों में ही यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर लोग नशे के शिकार अपने परिजनों को लोकलाज के डर से नशा मुक्ति केंद्रों में नहीं लाते। इस तरह राज्य में नशे के आदी लोगों की सही संख्या का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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